रायगढ़सारंगढ़

छत्तीसगढ़ वैष्णव महासभा सारंगढ़ एवं कोसीर मंडल के पदाधिकारियों का बैठक समपन्न.. 4 फरवरी को होगा विश्व शांति यज्ञ और रामानंदाचार्य जयंती…

रायगढ़/सारंगढ:-राष्ट्रीय महासचिव श्री लखन दास वैष्णव के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ वैष्णव महासभा द्वारा प्रतिवर्ष जगतगुरु रामानंदाचार्य जयंती एवं विश्व शांति यज्ञ का आयोजन कराया जाता है। इस वर्ष यह आयोजन 4 फरवरी को ग्राम माधोपाली के काली मंदिर प्रांगण में सम्पन्न होगा। विदित हो कि यह जगतगुरु रामानंदाचार्य जी की 721 वी जयंती होगी।

स्वामी रामानंदाचार्य जी को पूरे विश्व मे वैष्णव धर्म के पुनर्निर्माण एवं प्रचारक के रूप में जाना जाता है।
रामानंद अर्थात रामानंदाचार्य ने हिंदू धर्म को संगठित और व्यवस्थित करने के अथक प्रयास किए। उन्होंने वैष्णव सम्प्रदाय को पुनर्गठित किया तथा वैष्णव साधुओं को उनका आत्मसम्मान दिलाया। रामानंद जी वैष्णव भक्तिधारा के महान संत हैं। सोचें जिनके शिष्य संत कबीर और रविदास जैसे संत रहे हों तो वे कितने महान रहे होंगे।

इतिहास के अनुसार बादशाह गयासुद्दीन तुगलक ने हिंदू जनता और साधुओं पर हर तरह की पाबंदी लगा रखी थी। हिंदुओं पर बेवजह के कई नियम तथा बंधन थोपे जाते थे। इन सबसे छुटकारा दिलाने के लिए रामानंद ने बादशाह को योगबल के माध्यम से मजबूर कर दिया। अंतत: बादशाह ने हिंदुओं पर अत्याचार करना बंद कर उन्हें अपने धार्मिक उत्सवों को मनाने तथा हिंदू तरीके से रहने की छूट दे दी।

4 फरवरी को मनेगा जयंती और होगा विश्व शांति यज्ञ का आयोजन:- विगत वर्ष कोविड-19 ने जिस तरह की तबाही मचाई किसी से छिपा नही है, इस हेतु वैष्णव आचार्यों ने लोक कल्याण के लिए विश्व शांति यज्ञ का आयोजन जयंती के उपलक्ष्य में किया है।

जगतगुरु रामानंदाचार्य जयंती के उपलक्ष्य में मेधावी छात्रों का सम्मान, बुजुर्गो का सम्मान, समाज हित मे कार्य करने वाले वैष्णव संतो का सम्मान, श्रीमद्भागवत कथा, रामायण, कीर्तन इत्यादि का आयोजन होना है।

कोरोनकाल को ध्यान रखते सीमित संख्या में मनेगी जयंती:- जिला अध्यक्ष लखन दास

छत्तीसगढ़ वैष्णव महासभा जिला अध्यक्ष लखन दास वैष्णव ने बताया कि प्रतिवर्ष यह कार्यक्रम भव्य रूप में मनाया जाता है, विगत वर्ष जयंती सालर (सेमरा) में मनाया गया था जिसमे 8 से 10 हज़ार की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। परंतु कोरोनकाल को देखते हुवे इस वर्ष सीमित स्तर में इसे करने का प्रयास किया जाएगा।

सारंगढ़ में घर- घर से दान इकट्ठा करते हैं वैष्णव और कराते हैं भव्य भंडारा:-
छत्तीसगढ़ वैष्णव महासभा जिला रायगढ़ के महासचिव विश्वनाथ बैरागी ने बताया कि पूरे प्रदेश से सारंगढ़ अंचल में मनाये जाने वाला रामानंदाचार्य जयंती अनोखी होती है। सारंगढ अंचल में वैष्णव जन की आर्थिक स्थिति कमजोर है.! परन्तु प्रायः प्रत्येक ग्राम में वैष्णव जन निवास करते हैं और वो गाव के पुरोहित और गुरु कार्य करते हैं।

जिस प्रकार जगतगुरु रामानंदाचार्य जी ने जाती-भेद से दूर रहकर संत कबीर दास को अपना शिष्य बनाया था इसी प्रकार इस यज्ञ में जात-पात ,छुवाछुत, छोटे-बड़े, के भेदभाव को मिटाते हुवे प्रत्येक समर्थ और श्रद्धालुओं से स्वेक्षा से दान की मांग वैष्णव करते हैं, और इस यज्ञ को सफल बनाते आ रहे हैं। इस यज्ञ की समाप्ति के पश्चात प्रत्येक जाती- धर्म के व्यक्तियों के लिए प्रसाद स्वरूप भंडारे का आयोजन होता है, कोई भी श्रद्धालु यज्ञ में सम्मिलित हो सकता है..जो कि समाज मे समानता के भाव को प्रदर्शित करता है।

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