धरमजयगढ़रायगढ़

महुवा फूल बीनकर घर आ रहे ग्रामीण को हाथी ने मौत के घाट उतारा।

विनोद पटेल

धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल रेंज अंतर्गत हाटी सर्किल के बेहरामार से जामपाली जंगल के कक्ष क्रमांक पी.एफ. 549 में आज सुबह महुआ फूल बीनने गए बेहरामार निवासी राकेश राठिया पिता रत्थु राठिया उम्र 18 वर्ष को जंगली हाथी ने मौत के घाट उतारा।

राकेश राठिया अपने साथी टंकेश्वर राठिया के साथ बेहरामार से जामपाली जंगल मे महुवा फूल बीनने गया हुआ था जब दोनों दोस्त महुवा फूल बीनकर सायकल से वापस 7:30 बजे घर की ओर आ रहे थे तभी उनका सामना जंगली हाथी से हो गया। हाथी को देख सायकल चला रहा टंकेश्वर राठिया हाथी को देखकर सायकल से गिर गया और पीछे बैठा राकेश राठिया हाथी को देख जंगल की ओर भागने लगा राकेश राठिया को भागता देख हाथी से उसका पीछा किया और करीब 200 मीटर पीछा करने के बाद गुस्साए जंगली हाथी ने राकेश राठिया को मौत के घाट उतार दिया। वही मृतक का साथी मौके से भागकर बेहरामार गांव आकर ग्रामीणों और मृतक के परिजनो को पूरी घटनाक्रम को बताया जिसके बाद ग्रामीणों द्वारा तत्काल वन विभाग और छाल थाना में सूचना दिया गया। जिसके बाद विभाग और ग्रामीणों के मदद से बीच जंगल से मृतक राकेश राठिया के शव को बाहर निकाला गया ।

आपको बतादे की एक वर्ष पूर्व आज के दिन ही मृतक राकेश राठिया के बड़े भाई मृतक चनेश राठिया का मौत जंगली हाथी के द्वारा इसी कक्ष क्रमांक 549 में मारा गया था आज फिर एक वर्ष बाद रत्थु राठिया के दूसरे पुत्र की भी जीवनलीला हाथियों ने समाप्त कर दी।

राजेश चौहान (रेंजर छाल) :- मुझे घटना की जानकारी ग्रामीणों द्वारा मिली जिससे मैं अपने टीम के साथ तत्काल बेहरामार, जामपाली जंगल के कक्ष क्रमांक 549 पहुँचा जिसके बाद शव को ग्रामीणों व थाना स्टाफ के मदद से सबसे पहले शव को जंगल से बाहर लाया गया क्योंकि हाथी की मौजुदगी अभी भी जंगल मे है । हमारे तरफ से लगातार गाँव मे जा जाकर ग्रामीणों को मुनादी कराकर बताया जा रहा है कि ग्रामीण जंगलों में ना जाये ।

क्योकि ग्रामीण चंद रुपये की लालच में महुवा फूल बीनने के लिए जंगलों की ओर हाथी होने के बावजूद भी जाते है जिससे इस तरह की घटनाएं ना हो फिर भी ग्रामीणों जाते है।मेरा आग्रह है कि ग्रामीण अपना जान हथेली में लेकर चंद रुपये के लिए जंगलों की ओर महुवा बीनने ना जाये क्योकि हाथियों को भी महुवा फूल पसंद है वो भी इस पेड़ के नीचे मंडराते रहते है जिससे कभी भी इस तरह का अप्रिय घटना किसी के साथ भी हो सकता है। ग्रामीणों को जागरूक होने की बहुत आवश्यकता है।

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