सारंगढ़

कथित पत्रकार भरत अग्रवाल के ऊपर करे जल्द कार्यवाही देखिए वीडियो

आखिर उगाही करने वाले कथित पत्रकार भरत अग्रवाल पर कार्यवाही करने क्यो कांप रही सारंगढ पुलिस की हाथ

कथित पत्रकार भरत अग्रवाल पर कड़ी कार्यवाही करे अन्यथा उग्र आंदोलन करेंगे – भीम आर्मी सारंगढ़

सारंगढ न्यूज़

एक मामला शांत अभी हुआ ही नही है और फिर एक बार प्रशासनिक अधिकारी को फसाने की कोशिस में लगे हुए है वसूलीबाजी पत्रकार। हैरत की बात तो ये है कि पुलिस विभाग के बड़े अधिकारी के ऊपर गाली गलौच का नया फंडा इस बार चला है। जबकि पहले भी एक अधिकारी के ऊपर गाली गलौच और मारपीट किया गया था। उक्त मामले में जेल की हवा भी उक्त पत्रकार व उसके एक साथी को खानी पड़ी थी। उस मामले में अभी जमानत पर रिहा हुआ है। वही सतनामी समाज के अधिकारी जितेंद्र खूँटे एस डी ओ पी सारंगढ को षड्यंत्र पूर्वक फंसाने के संबंध में निष्पक्ष कार्यवाही हेतु आज रायगढ़ सतनामी समाज के पदाधिकारियों के द्वारा पुलिस अधीक्षक रायगढ़ से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा गया। जिसमे कथित पत्रकार को जल्द से जल्द कार्यवाही करने की मांग किया गया। अन्यथा बड़े स्तर पर उग्र आंदोलन की बात भी किया गया है।

पुलिस विभाग के विभागीय अधिकारी के ऊपर गाली गलौच किया गया है लेकिन पुलिस विभाग ही मेहरबान क्यो यह बात समझ से परे है। सारंगढ़ के कुछ पत्रकारों के ऊपर बिना स्पष्ट जांच के एफआईआर दर्ज किया गया है, लेकिन साहू समाज के निर्माणाधीन धर्मशाला में खबर न छापने और शिकायत न करने के एवज में कथित पत्रकार भरत अग्रवाल,ओंकार केशरवानी,और कुछ तथाकथित पत्रकारों द्वारा रुपयों की मांग किया गया था। जिसमे जांच अधिकारी एसडीओपी जितेंद्र खूंटे द्वारा कथन लेने बुलाया था। जिसमे पत्रकार भरत, अधिकारी को ही गाली गलौच देकर ऑफिस से निकलते बने लेकिन आन इतने दिनों बाद भी भरत अग्रवाल के नाम पर लिखित शिकायत देने के वावजूद भी पुलिस प्रशासन मौन दिखाई दे रहे है। और ध्यान देने वाली बात इस लिए क्योंकि पुलिस विभाग के एक अधिकारी का ही संरक्षण उक्त पत्रकार को दिया जा रहा है। आये दिन थाना सारंगढ के आस पास ही कुछ पत्रकार सुबह से शाम तक दिखाई देते है। लिहाजा सवाल समझने योग्य ठहर गया क्योंकि उनके विभाग के ही कर्मचारी का वसुलीबाज को सहयोग मिल रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं मामले को।

वसुलीबाज पत्रकार भरत और अंचल के होनहार एसडीओपी जितेंद्र खूंटे विवाद में आज फिर एक बड़ा मोड़ आया। आज दिनांक 28 नवंबर को सतनामी विकास परिषद सारंगढ के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अपने समाज के शान और अंचल के कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के हितों की रक्षा करने हेतु रायगढ़ कुच किये व रायगढ़ पुलिस कप्तान संतोष सिंह के समक्ष अपनी बात रखी. सतनामी विकास परिषद सारंगढ के पदाधिकारियों ने अपने आवेदन में मुख्य रूप से एसडीओपी सारंगढ जितेंद्र खूंटे के खिलाफ किये गए प्रायिजित कूटरचना का जिक्र किया। वहीं आवेदन में वसुलीबाज भरत अग्रवाल के खिलाफ दिनांक 11.7.2010 को दर्ज सारंगढ थाना के मामले का भी जिक्र है। गौरतलब है की 10 साल पहले इसी पत्रकार के द्वारा दलित समाज के ही एक कृषि उद्यानिकी अधिकारी के साथ भरत व उसके एक साथी द्वारा मारपीट की गई थी उक्त मामले में बाकायदा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट द्वारा 5 साल की सजा भी भरत अग्रवाल व उसके साथी को सुनाया गया था. मामले पुनः याचिका हाइकोर्ट में लगाया गया था जिसके कारण से भरत अग्रवाल जमानत में बाहर चल रहा है।

एसडीओपी को फंसाने का प्रयास भरत द्वारा

सतनामी विकास परिषद सारंगढ के द्वारा दिए आवेदन मके स्पष्ट तौर पर भरत अग्रवाल द्वारा एसडीओपी जितेंद्र खूंटे की छवि खराब करने हेतु कुत्सिक प्रयास का उल्लेख है। जानबूझकर भरत अग्रवाल के द्वारा एसडीओपी जितेंद्र खूंटे की छवि खराब करने हेतु सोशल मीडिया में पोस्ट वायरल किया गया ताकि येन तेन प्रकारेण साहू समाज धर्मशाला मामले में वह बच जाए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूरा षणयंत्र एसडीओपी जितेंद्र खूंटे के ही एक अधीनस्थ अधिकारी द्वारा रचा गया था जिस पर 50 से ज्यादा जनता की शिकायतें हैं और सभी में सारंगढ के ऊर्जावान एसडीओपी जितेंद्र खूंटे ही जांच अधिकारी हैं ऐसे में पूरा कूटरचना का मास्टर माइंड पर किसी की नजर न जाना भी किसी आश्चर्य से कम नही है।

साहू समाज के शिकायत का मूल कारण

जिस शिकायत के कारण कुख्यात पत्रकार भरत को एसडीओपी ने बयान हेतु तलब किया था उसका मूल कारण साहू समाज द्वारा निर्माणाधीन सामाजिक भवन है जिसके बारे में पहले शिकायत और बाद में अवैध उगाही का प्रयास भरत व उसके साथी ओंकार केसरवानी द्वारा किया गया था जिससे क्षुब्ध होकर साहू समाज के पदाधिकारियों ने विगत 3 नवम्बर को जनचौपाल में रायगढ़ एसपी संतोष सिंह से भरत अग्रवाल, ओंकार केसरवानी और वीशू गुरु नामक व्यक्ति के खिलाफ शिकायत की थी, उक्त शिकायत के तारतम्य में भी एसपी रायगढ़ ने एसडीओपी जितेंद्र खूंटे को सूक्ष्म जांच का जिम्मा सौंपा था।
असली मास्टर माइंड को अभयदान मिल गया
सूत्र कहते हैं की पूरे प्रकरण में अपने उच्च अधिकारी के खिलाफ कूटरचना रचने वाले एक पुलिस अधिकारी पर किसी की नजर नही गयी है और वह पूरी तरह से एक बड़े सत्ताधारी नेता के अशीर्वादतले चैन की बंसी बजा रहा है। साहू समाज जहां न्याय की आस लिए दो से तीन बार रायगढ़ के संवेदनशील पुलिस कप्तान संतोष सिंह को आवेदन दे चुका है वहीं सतनामी समाज भी नगर स्तर के अलावा जिला स्तर के पदाधिकारियों के द्वारा भी एसपी रायगढ़ को आवेदन प्रेषित कर चुका है व न्याय की राह देख रहा है. आने वाले दिनों में भी यदि इसी तरह से कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों को लक्ष्य बनाकर कार्य संपादित किये जाएंगे तो सारंगढ में उग्र आंदोलन को रोकना असम्भव हो जाएगा ऐसा पीड़ितों का कहना है.

क्या कहते हैं एसपी संतोष सिंह

इस मामले में रायगढ़ जिले से संवेदनशील पुलिस कप्तान संतोष सिंह ने आवेदन लेते हुए कहा की इस मामले में जांच चल रही है और जांच पूरी होते ही कार्यवाही की जाएगी।

क्या कहते हैं सतनामी विकास परिषद अध्यक्ष देव कोसले

भरत अग्रवाल एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है पूर्व में भी एक उद्यान अधिकारी श्री धृतलहरे से पैसा उगाही हेतु 300 किसानों के सामने सन्न 2010 में बुरी तरह मारपीट किया था। हमारा समाज यह सब बर्दाश्त नही करेगा। एसपी सर ने हमे आश्वासन दिया है की जांच चल रही है। अगर दोषी पर कार्यवाही नही होगी तो आरपार की लड़ाई हमारे समाज द्वारा लड़ा जाएगा. उक्त पत्रकार हमेशा थाना के आसपास ही नजर आते रहता है आखिर किसका उसे संरक्षण है जिसके कारण वह हमेशा वहीं नजर आता है वह एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है।

क्या कहते हैं पूर्व विधायक व पूर्व राज्य मंत्री छबि लाल रात्रे

हमे मिली जानकारी के अनुसार भरत अग्रवाल जो एक क्रिमिनल किस्म का व्यक्ति है। एसडीओपी जितेंद्र खूंटे के दफ्तर में उसके द्वारा पैरों से लात मारकर दरवाजा को मारते हुए प्रवेश किये व एसडीओपी के साथ बदतमीजी व अमानवीय व्यवहार किये। पूर्व में भी उसके द्वारा लगभग 10 साल पहले हमारे ही समाज के एक उद्यानिकी अधिकारी से भरत के द्वारा मारपीट की गयी थी जिस मामले में वह जमानत पर चल रहे है लेकिन फिर भी यह सुधरने वालों में से नही है। हमारा समाज यह सब अत्याचार नही सहेगा।

क्या कहते हैं भीम आर्मी ब्लॉक अध्यक्ष मनिंदर सिंह आजाद

सारंगढ के पत्रकार भरत अग्रवाल का तानाशाही रवैया हमारा समाज बर्दाश्त नही करेगा। आज एसपी सर ने हमे आश्वासन दिया है की कार्यवाही करेंगे लेकिन यदि कार्यवाही नही की गई तो हमारे द्वारा पूरा सारंगढ बंद किया जाएगा और उग्र से उग्र आंदोलन करेंगे लेकिन हमारा समाज अब यह सब बर्दाश्त नही करेगा। पूर्व में भी समाज के एक अधिकारी पर यह अत्याचार व अमानवीय प्रवृत्ति का परिचय दे चुके हैं जिस प्रकार से थाना में उन्हें संरक्षण मिल रहा है वह अनुचित है।

आखिर क्यों कार्यवाही से बच रही पुलिस

पूरे मामले में यह बात दिलचस्प है की जहां सारंगढ थाने का एक अधिकारी किसी भी पत्रकार के खिलाफ मामला आते ही आधी अधूरी विवेचना में ही सीधा 384 की धारा लगा देता था वह इस पूरे मामले का निपटारा करने में क्यों भीड़ा हुआ है. जिन पत्तलकारों की वजह से भ्रष्ट्र पुलिस अधिकारी को एक हीरो की तरह पेश किया गया उन्ही में से एक चाटुकार पत्तलकार आज जनता के कोपभाजन का शिकार हो रहा है जिसके कारण उक्त पत्तलकार को बचाने हेतु सारंगढ थाने का एक अधिकारी पूरी ताकत झोंक चुका है अगर सूत्रों की मानें तो उक्त अधिकारी को नंदेली हॉउस से भी आशीर्वाद मिला हुआ है जिसके कारण 50 शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाही उक्त पुलिस अधिकारी पर नही हो रही है वहीं उक्त अधिकारी के साथ वसुलीबाज पत्रकार के लिए भी संरक्षण रूपी आशीर्वाद प्राप्त कर लिया गया है. बहरहाल नंदेली हाउस की भूमिका के बारे मे सच्चाई चाहे जो भी हो किन्तु इतना तो तय है की बिना मजबूत संरक्षण के ना ही वसुलीबाज यूँ निश्चिंत होकर घूमता और ना ही थाना का भ्रष्ट्र
अधिकारी अपने उच्च अधिकारी के खिलाफ कूटरचना की हिम्मत कर पाता। ज्ञापन देने पहुचे सतनामी समाज के श्री देव प्रसाद कोशले, डॉ. छबिलाल रात्रे,श्री घनश्याम मनहर,किशोर मनहर,कन्हैया जांगड़े,विनोद भारद्वाज,जीवन रात्रे,नवधा अनंत,लाभो लहरे,कुलदीप खूंटे, लक्ष्मी लहरे,बसन्त सुमन,रामदास खुराना,रविशंकर,नारायण रत्नाकर,एस कुमार निराला,गौकुल भारद्वाज,मंशा कुर्रे,बलि राम कुर्रे,टुकेस्वर सोनी,सन्त लाल जांगड़े,राहुल भारती, दिनेश जोल्हे, चन्द्रिका भस्कार,कृष्ण महिलाने, मुकेश जोल्हे,टारजन महेश, मनिंदर सिंह आजाद ,लकेश्वर जांगड़े,अभिषेक निराला,राजकुमार वारे, रामनाथ निराला, मनीष सिंह आजाद,नरेंद्र चौरगे, हरिवंस घृतलहरे,कुश राम कुर्रे,उमेश टण्डन, गोविंद टण्डन, सम्पत निराला,राम दास।

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