सारंगढ़

बेटी समाज का दर्पण : ABVPछात्रा प्रमुख टिया चौहान


सारंगढ़। मुझे गर्व है मैं उस अंचल में रहती हूं जहाँ बालिकाओं को स्वत्रंत अधिकार से वंचित नहीं किया जाता जिहां सारंगढ़ भले छोटा शहर है पर यहां का माहौल बेटियों के उत्थान के लिए अनुकूल वातावरण में अद्भुत भूमिका प्रदान करती है।जैसा कि साक्ष्य है बेटी समाज में दर्पण तुल्य होती है हम अपने दैनिक जागरण में इस बात को जितना महत्व दें हमारे समाज के लिए बेटियों के भविष्य के लिए लाभदायक सिद्ध होता है।
केंद्र सरकार,राज्य सरकार की कई योजनाएं संचालित होती हैं जैसे नारी शसक्तीकरण,सुकन्या समृद्धि योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,इत्यादि इसलिए ताकि हम भी जागरूकता के साथ इन सब योजनाओं से समाज में बेटी के अस्तित्व को प्रखर कर सकें और जब बेटी प्रबल होगी तो समाज निश्चित रूप से उत्थान प्रशस्त होगा।कहते हैं न घर में एक बालक पढ़ता है तब वहीं साक्षर होता है परन्तु किसी घर में जब एक बालिका पढ़ती है तो एक पूरा परिवार शिक्षित होता है।
अब रुख करते हैं उन बिंदुओं पर जिनसे तय होता है घर के परवरिश का यहां बात बेटी की नहीं बल्कि नैतिक पतन बेटों की जिनसे कहीं न कहीं आज भी समाज दुष्परिणाम के आतंक से बालिकाओं की उड़ानों पर बंदिशें लगाती हैं।ध्यान दें एक साथ पले बढ़े दो बच्चों(बेटा-बेटी)में नैतिक असमानताओं की वजह में सबसे बड़ी चुनौती परवरिश में होती है बाद उसके बाहरी माहौल की।धूमिल करती बेटी शब्द की महत्ता को समाज की संस्कृति को आज आवश्यकता है सर्वप्रथम स्वयं परिवार के सहयोग की तपश्चात गर्व से हुंकार भरिएगा “बेटी समाज की दर्पण होती है।”
“धन्य धन्य वो धरती जहाँ देश की भूमि भी माता कहलाती है…
धन्य धन्य इस देश की संस्कृति जिनमें बेटी देवी तुल्य सर्वमान्य हैं…..
धन्य धन्य ऐ देश की माटी जिसमें कई पराक्रमी,स्वाभिमानी चिंगारियों के मशाल बेटी को परिभाषित करते हैं….
धन्य धन्य मेरे देश की सभ्यता जिनसे बेटी;दुर्गा,लक्ष्मी,सरस्वती,मंगला,गौरी से सम्मानित होते हैं।
घर से निकल,गली मोहल्ले से होते हुए क़स्बे-शहरों-महानगरों में आज बेटी नारी जाति,नारी समाज को एक डॉक्टर,शिक्षिका,अभियंता, वकील,खिलाड़ी,नेत्री,कुशल प्रशासक की छवि निर्मित कर रही है यहीं साक्ष्य है समाज का।

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