सारंगढ़

सारंगढ़ मे गुरु घासीदास बाबा की जयंती हर्सोल्लास के साथ मनायी जा रही बाइक रैली व शोभायात्रा और गुरु घासीदास बाबा की चरित्र वर्णन कर लोगों को मनखे मनखे एक समान का दिया जा रहा संदेश

गुरु घासीदास बाबा द्वारा प्रतिपादित समानता और मानव अधिकार पर आधारित सभी सिद्धांत आज भी मानव जीवन के बेहतरी के लिए प्रासंगिक है; उनके सिद्धांत युगों युगों तक प्रासंगिक रहेंगे। उनके सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक और शैक्षणिक आंदोलन से केवल सतनामी समाज ही नहीं वरन देश का हर जाति, वर्ण और धर्म के लोग लाभान्वित हुए हैं; खासकर दलित और महिलाएं। महिलाओं की बात होती है तो केवल महिला तक सीमित समझना न्यायोचित नहीं है क्योंकि हम सब महिलाओं के गर्भ ही जन्म लेते हैं।

महिलाओं के बेहतर जीवन के अभाव में पुरुषों का जीवन भी व्यर्थ और अधूरा है, क्योंकि महिलाएं हर स्तर हर पुरुषों के जीवन और सुख में भागीदार रहती हैं। इसके बावजूद कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा गुरु घासीदास बाबा को किसी एक समाज का आराध्य/गुरु बताने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि वे समूचे मानव समाज का गुरु हैं। गुरु घासीदास बाबा के मानव मानव एक समान का सिद्धांत समस्त सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक सिद्धांतों का मूल संक्षेप है। उल्लेखनीय है कि गुरु घासीदास बाबा का जन्म ऐसे समय में हुआ जब पूरे देश में सामाजिक असमानता, छुआछूत, द्वेष, दुर्भावना और घृणा जैसे घोर अमानवीय सिद्धांतो के माध्यम से समाज कई वर्गों खासकर शोषक और शोषित वर्ग में बटा हुआ था, जिसे समाप्त करने में गुरु घासीदास बाबा का अहम योगदान है।

आज गुरु घासीदास बाबा जी की 264 जयंती है, गुरु घासीदास बाबा के द्वारा सामाजिक चेतना के लिए किए गए योगदान को किसी एक लेख में समाहित कर पाना संभव नहीं है, खासकर तब जब उनके योगदान को पूरी ईमानदारी और निष्ठा से इतिहास में लिखा न गया हो। कपोल कल्पित कहानी के माध्यम से उन्हें चमत्कारी पुरुष के रूप में प्रचारित कर उनके मूल योगदान को भुलाने का भी षड्यंत्र रचा गया; कुछ अशिक्षित, अज्ञानी और अतार्किक लोगों के द्वारा अपने लेख, गीतों के माध्यम से अतिसंयोक्तिपूर्ण अवैज्ञानिक साक्ष्य के माध्यम से उनके कार्य के मूल प्रकृति के खिलाफ गुरु घासीदास बाबा के चरित्र का वर्णन किया गया है।

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