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सारंगढ खबर छपने के बाद कारवाही के डर से बौखलाया सरपँच पहुचा थाने।

*खबर प्रकाशित होने से कारवाही के डर से बौखलाकर सरपँच ने पत्रकार के नाम किया झूठी शिकायत*


*पत्रकार दिनेश जोल्हे ने सरपंच द्वारा लगाए गए सारे आरोपों को खंडित कर बताया बेबुनियाद*

*वन विभाग के द्वारा जंगली पत्थरो की शिकायत व खबर छापने के बाद जांच दल का किया गठन*

*सारंगढ़*:- मामला दरअसल सारंगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत छातादेई का है जहां पत्रकार पहुचे 2 अप्रैल को कवरेज और सरपँच ने आरोप लगाया 1 अप्रैल को पंचायत आकर अवैध वसूली करने का लगाया आरोप जबकि पत्रकार दिनेश जोल्हे वहां 2 अप्रैल को पहुचा और शिकायत वसूली की 1 अप्रैल के नाम पर किया अगर पत्रकार की मोबाइल को ट्रेस किया जाएगा तो स्पष्ठ हो जावेगा। वर्तमान सरपंच विजय विक्की पटेल के निर्माणधीन सिंचाई नाली और सीसी रोड के ऊपर ग्रामीणों ने गुरु चेला न्यूज़ पोर्टल के पत्रकार दिनेश जोल्हे को दूरभाष के माध्यम से जानकारी दिया कि जंगली पत्थरों से 9 लाख 66 हजार लागत से बन रहे मनरेगा योजना अंतर्गत की जानकारी दिया जिस पर पंचायत पहुच कर पत्रकार के द्वारा खबर प्रकाशित कि जिसमे अभ्यारण्य के पत्थरो से निर्माण करवाना व जेसीबी से कार्य करवाते दिखा जिसकी खबर बड़ी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया जिसपर वन विभाग ने जांच दल गठित भी कर दिया गया। इससे सरपँच ने बौखलाक़र झूठी शिकायत किया है।

*थाना में शिकायत की पुष्टि के द्वारा दिनेश जोल्हे से दूरभाष पर संपर्क किया गया जिसमें दिनेश जोल्हे के कथन*:-


बातचीत के दौरान दिनेश जोल्हे ने बताया कि ग्राम पंचायत छातादेई के ग्रामीणों के द्वारा दूरभाष के माध्यम से शिकायत किया गया था और शिकायत के अनुसार ही स्थिति वहां बनी हुई थी ग्राम छातादेई में जंगली पत्थरों से मनरेगा के कार्य किए जा रहे हैं और जेसीबी से कार्य किए जा रहे हैं एवं जेसीबी से किए गए कार्य स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे। 20-25 दिन पूर्व बने सीसी रोड टूटा हुआ था। जिस पर हमारे द्वारा न्यूज़ चलाया गया था । जिसकी खबर बनने के बाद पुनः सीसी रोड का मरम्मद किया गया। वन विभाग से भी शिकायत किया गया था जिसमें वन विभाग के द्वारा जांच दल गठित कर दिया गया जो कि एक-दो दिन के अंदर में जांच होने वाला है। चुकी सरपंच के खिलाफ कार्यवाही होने वाली है जिसमें ग्रामीणों के द्वारा भी शिकायत किया गया है कि जंगली पत्थरों के द्वारा मनरेगा का कार्य किया जा रहा है एवं मनरेगा के कार्य में जंगली पत्थर से जेसीबी से कार्य करने का कोई नियम नहीं होता दिनेश जोल्हे ने बताया कि मेरे द्वारा लगातार खबर चलाने के कारण वन विभाग कार्यवाही करने वाली है, जिस कारण से ग्राम पंचायत छातादेई के सरपंच आवेश में आकर , डर में आकर, भयभीत होकर हमारे नाम से झूठी, मिथ्या, शिकायत किया गया है सभी शिकायत निराधार है।



*छातादेई सरपंच से पत्रकार की जान-पहचान नही*:-
आगे दिनेश जोल्हे ने बताया कि ग्राम पंचायत छातादेई के सरपंच से ना उनकी कभी मुलाकात हुई है और ना ही कभी बातचीत हुई है। न किसी प्रकार की कोई लेनदेन नही हुआ है।

*ग्रामीणों के शिकायत पर पत्रकार ने छापा था ,निष्पक्ष खबर जिसपे वन विभाग ने जांच दल गठित भी किया तैयार*
ग्रामीणों द्वारा पत्रकार दिनेश जोल्हे को शिकायत मिला जिस पर जाकर खबर प्रकाशित किया जहां लगातार 2 बार खबर छापने से ही सरपँच तिलमिला गया और झूठी शिकायत भी कर डाला। आगे जानकारी मिला कि वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के शिकायत पर एक बार जंगली पत्थरों की जप्ती हो चुकी है। जहां फिर धड़ल्ले से जंगली पत्थरों से निर्माण कर रहे है जिससे तिलमिला के झूठी शिकायत किया गया है।



*भ्रष्टाचार के खिलाफ आगे भी लड़ाई जारी रहेगा*:-
इस पर दिनेश जोल्हे ने कहा कि जहां भी गलत कार्य दिखा वहां गुरु चेला पहुंचेगी और सत्यता के साथ निष्पक्षता, सटीक, सार्थक खबर आज भी चलाई है और कल भी चलायेगी। और खबर को पाठक, आम जनता, एवं अधिकारियों तक पहुंचाएगी।
*पत्रकार ने जांच का हवाला दिया*:-


पत्रकार दिनेश जोल्हे ने जांच का हवाला देते हुए कहा कि अगर छातादेई सरपंच ने मुझे पैसा दिया है तो कहां पर दिया है, किस जगह पर दिया है, आखिर पैसा दिया है तो क्यों दिया है, मैं उस जगह पर था ही नहीं, और ना ही मैं कभी सरपंच से मिला हूं, मेरा चेहरा कैसे दिखता है,अगर मुझे सरपंच ने देखा होगा तो सिर्फ वीडियो में देखा होगा, और जांच के डर से सरपंच के द्वारा हमारे खिलाफ झूठी शिकायत मिथ्या पूर्वक ग्राम वासियों को डरा कर शिकायत किया गया है, सरपंच के द्वारा किया गया सारे शिकायत झूठे और बेबुनियाद है यह सभी जांच के विषय रहेंगे। जिसपर निष्पक्ष जांच करने से स्पष्ठ हो जाएगा।

*खबर प्रकाशित पर जंगली पत्थरो का पहचान स्पष्ठ झलक रहा है,जिसपर वन विभाग की कारवाही एक बार हुआ पुनः कारवाही के लिए टीम गठन*


अभ्यारण्य पत्थरो की चोरी पर क्या वन विभाग दण्डात्मक कारवाही के साथ सरपँच ऊपर जुर्माना लगाएगा ,क्या वन विभाग पर वन्यजीव के ऊपर पकड़ाने वाले क्या या जंगली पेड़ पर ही कारवाही करने का नियम है। क्या जंगल के अभ्यारण्य पत्थरो पर नही होता कारवाही अगर ऐसे स्थिति बना रहे तो जंगल के सीना छल्ली करने वाले एक दिन जंगल के सफाया कर देंगे।

*मनरेगा कार्य मे अभ्यारण्य पत्थरो का उपयोग क्या यह न्यायोचित है*
ग्राम पंचायत छातादेई में लाखों रुपये से हो रहे सिंचाई नाली निर्माण कार्य मे जंगली पत्थरो का उपयोग की खबर प्रकाशित पर बौखलाक़र झूठी शिकायत कर रहे है। इस पर वन विभाग को भी करनी चाहिए कारवाही।

कार्यवाही के डर से तिलमिलाया सरपंच… झूठी शिकायत लेकर पहुंचा थाने……

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