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सारंगढ़ के इस पंचायत में सरपंच-सचिव द्वारा ‘अंधेर नगरी चौपट राजा ‘ का खेल जारी…..

सारंगढ़ 8 jun 2021 । रायगढ़ जिले के सारंगढ जनपत पंचायत क्षेत्र में ऐसे ऐसे पंचायतो की भरमार लगी हुई है। जहां भ्रष्टाचार का ताला लगा हुआ है अगर इसकी चाबी किसी के हाथों आ जाये तो पूरी काला तिखथाओ का सूची सामने आने से कोई रोक नही सकता। लेकिन जनपद सीईओ के पास तो दो-दो चाबी है लेकिन आखिर खोल क्यो नही रहे दरअसल सारंगढ जनपद पंचायत में 129 ग्राम पंचायत समाहित है जहां सभी पंचायतो को शासन से 14 वें वित्त योजना का आबंटन 2020 तक हुआ था। ये योजना प्रत्येक कार्यकाल में बढ़ते हुए चला जाता है। जैसे एक 5 वर्षीय कार्यकाल में 14 वे वित्त रहेगा तो दूसरे कार्यकाल में 15 वे वित्त योजना ऐसे ही बढ़ता हुआ जाता है। जिससे पंचायत को सीधे खाते में राशि मिलता है। जिसकी कोई मूल्यांकन,सत्यापन नही होता है। सीधा जिला पंचायत से जनपद पंचायत पर आती है। जनपद पंचायत से ग्राम पंचायत जाने के लिए जनपद पंचायत से डिजिटल सिग्नेचर की आवश्यकता होती है। जिसके बाद सीधा पंचायत खाते पर राशि का आबंटन हो जाता है। लेकिन डिजिटल सिग्नेचर करने वाले व्यक्ति भी लाजवाब होते है। बिना वेंडर के नाम पर भी डीएससी कर दे रहे है जिसको कमीशन के तौर पर जनपद के बाहर बैठे 2 अचूक नजर वालो से के पास फर्जी करने का दुकान खोल बैठा है। इनका चिठ्ठा अगला अध्याय में दिखाएंगे आपको।14 वे वित्त योजना की राशि को शासन द्वारा ग्राम पंचायत में जनसंख्या के हिसाब से और विकास कार्यो के लिए दिया जाता है जिसमे मूलभूत सुविधाओं को भरपूर करना रहता है। पंचायत पर जैसे नाली निर्माण,बोरिंग बोर खनन,पचरी निर्माण,रोड निर्माण ,मरम्मद आदि जैसे कार्यो में विकास कार्य करवाया जाता है। जिसकी राशि का भुगतान किसी व्यक्ति विशेष नही भेज सकते । 14 वे वित्त की राशि को वेंडर के खाते में भेजा जाता है। जिससे पक्की बिल पंचायत को दिया जाता है जिसको जनपद पंचायत में शो किया जाता है।

वेंडर मतलब जिसके पास CGGST हो और उनके नाम पर कोई फर्म हो उसके खाते में पैसा ट्रांसफर करके वहां से सामान लिया जाता है”

ग्राम पंचायत जेवरा में सचिव सतनोहर जोल्हे निवासी हिर्री कार्यरत है , जिसने वेंडर भुगतान न करके अपने ‘बड़े भाई भरत जोल्हे अपने मित्र सेवक राम जोल्हे,अपने मित्र के भाई संजय जोल्हे,और अपने भाभी परमेशरी जोल्हे के नाम पर भुगतान करवा दी है। ‘ ताजूब की बात बताये आपको इसमे 4 लोगो के नाम डिटेल तो डाला गया है लेकिन बैंक एकाउंट नम्बर एक व्यक्ति का ही शो किया गया है।

14 वे वित्त की ट्रांजेक्शन जानकारी इनके बैंक खाते नम्बर भी शामिल है।

371801000229 इस खाते नम्बर पे 8 व्यक्तियो के नाम पर जोड़ा गया है। अर्थात 4 व्यक्ति सचिव के घर के नाम है तो 4 व्यक्ति सरपँच के घर के नाम है और एक एकाउंट नम्बर को 8 लोगो के ऊपर शो किया गया है। जिसमे 34885 चौतीस हजार आठ सौ पच्चासी रुपये भेजा गया है। भुगतान दिखाकर राशि को भेजा गया है। इसका आंशिक नियम होता है, जब तक वेंडर नही रहेगा तो सामग्री कैसे दे पाएगा जो उनके नाम पर राशि का आहरण करवा दिया गया। बता दे आपको की नाली निर्माण पर सामग्री की भुगतान अगर सचिव के भाई,भाभी और उनके मित्रो के नाम पर फर्म रहता तो वेंडर ट्रांसफर करवाते जो सही रहता लेकिन न तो उनके नाम पर कोई वेंडर है और न ही कोई फर्म जहां से सामग्री की भुगतान हेतु राशि भेजा जाता । इससे सीधी सीधी अधिकारी की भी संलिप्त होने की खबर मान सकते है। क्योंकि जिसको कमीशन भेजा गया होगा या कमिशन कटने के बाद डिजिटल हुआ होगा। आखिर सवेंदनशील सीईओ अभिषेक बनर्जी के रहते हुए। इतने बड़े काला मटोल कैसे छिप गए कही कर्मचारी की मिलीभगत से अधिकारी तक फाइल जाते जाते भ्रष्टाचार कि दीमक ने सेंध तो नही मार लिया । अब पूरी जानकारी जांच के बाद ही कन्फर्म हो पायेगा लेकिन सचिव के कार्यप्रणाली पर इतने बड़े भ्रष्टाचार की पन्ना कैसे दब गया इसमे कार्यवाही किया जाता है या पूर्व की भांति अभयदान करने के लिए टेबल के नीचे से चढ़ोत्तरी पहुच जाता है।
वही पिछले कुछ महीने में रोजगार सहायकों से छोटी सी मिस्टेक होने से उनकी सेवा समाप्त कर दिया गया। मनरेगा शाखा में पदस्त कम्प्यूटर ऑपरेटर और सहायक एपीओ को तत्काल गोपनीय प्रतिवेदन में आचरण छिपाकर समाप्त कर दिया गया। तो क्या सवेंदनशील सीईओ भ्रष्टाचार को बढ़ावा और लाखों रुपये राशि को गबन करने वाले सचिव के ऊपर सेवा समाप्त करने की कार्यवाही करते है या उनको मौका दिया जाता है।

सुधार करने की अगर उनको सुधारने की मौका दिया जाता है तो पूर्व में जिनकी सेवा समाप्त कर दिया गया उनको भी मौका देना था। लेकिन ऐसा नही हुआ इसलिए जनपद सीईओ अभिषेक बनर्जी की कार्यवाही करने की तरीका से गलत कार्य करने वाले चाहे कोई भी कर्मचारी हो कार्यवाही करते ही है। जनपद सीईओ से कार्यवाही के साथ साथ राशि वसूली करने की पालन प्रतिवेदन उच्च अधिकारी को भेज कर भ्रष्टाचार करने वाले कर्मचारियो की मनोबल को बढ़ने से रोके। जब ने सरपँच और सचिव का वास्तविकता पता किया तो यह जानकारी छनकर विश्वसुत्रो से जानकारी प्राप्त हुई:-

“ग्राम पंचायत जेवरा की सरपँच और सचिव हिर्री निवासी सतनोहर जोल्हे दोनो पंचायत की दूरी तकरीबन लगभग 6 से 7 किलोमीटर के दरमियान होगा अब सचिव ने अपने बड़े भाई जो घर बनाने का मिस्त्री कार्य करता है उसके भाभी हाउस वाइफ है। रही बात उसके मित्र सेवक जोल्हे जो पैसा लेन देन का सीएससी चलाता है वही संजय जोल्हे गांव में ही रहकर अपना खेती किसानी करता है यथार्थ इन 4 व्यक्तियो का किसी प्रकार का कोई भी फर्म या छड़,सीमेंट,गिट्टी,रेत,ईट का कोई दुकान दार नही है। तो इनके नाम पर लाखों रुपये कैसे भेज कर गफलतबाजी किया गया है। आप हैरान तो तब हो जाएंगे जब इनका और गोपनीय बाते जानेंगे गोपनीय बातें सबका ac नम्बर एक ही है और नाम अलग अलग जनरेट करवाया गया है। आखिर इतने बड़े भ्रष्टाचार को छिपाने में कामयाब कैसे हो गया ये जो घटना हुए है 13 मई 2020 के आस पास हुआ है लगभग एक वर्ष वित जाने के बाद किसी अधिकारी के नजर तक नही पढना समझ से परे है।”

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