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पोषण: सुपर फूड्स से पाएं सुपर हेल्थ, इन चीजों को करें डाइट में शामिल

  • शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ज़रूरी है पोषण। इसमें सहायक हैं सुपरफूड्स।
  • पौष्टिक भोजन के साथ-साथ इन सुपरफूड्स को आहार में शामिल करें और अपनी सेहत में बदलाव देखें।

शरीर को स्वस्थ बनाने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार बेहद ज़रूरी है। भारतीय रसोई में ऐसी कई सामग्रियां मौजूद हैं जो पोषण का भंडार हैं। फ़ेहरिस्त लंबी है, लेकिन इनमें कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जिन्हें रोज़ाना के आहार में शामिल करना चाहिए। इनमें दूसरों के मुक़ाबले ज़्यादा पोषक तत्व होते हैं, इसलिए इन्हें कहते हैं सुपर फूड। इन देशी सुपरफूड्स और इनसे जुड़े लाभों के बारे में इस लेख में पढ़िए।

रागी, बाजरा और ज्वार

ये ऐसे अनाज हैं जिनमें गेहूं और चावल की तुलना में बेहतर पोषक तत्व मौजूद होते हैं। ये लौह तत्व (आयरन), कैल्शियम, ज़िंक, फास्फोरस, मैग्नीशियम, विटामिन बी9 और बीटा कैरोटीन से भरपूर होते हैं। मोटे अनाज ग्लूटेन-फ्री होते हैं और ये सीलिएक रोग से पीड़ित लोगों के लिए फ़ायदेमंद हैं। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है जिसके चलते मधुमेह रोगियों को इनका सेवन करने की सलाह दी जाती है। मोटे अनाजों में मौजूद फाइबर्स मल को मुलायम करके आसानी से बाहर निकालने में सहायता करते हैं, कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करते हैं और पेट के कैंसर का ख़तरा घटाते हैं।

सूखे मेवे और नट्स

नट्स और तिलहन उच्च गुणवत्ता वाले शाकाहारी प्रोटीन युक्त ऊर्जाप्रद खाद्य पदार्थ हैं। ये कोलेस्ट्रॉल के स्तर, हड्डियों से खनिज पदार्थों का निकलना (बोन डिमिनरलाइजेशन), उच्च रक्तचाप, इंसुलिन प्रतिरोध और हृदय से जुड़ी समस्याओं को कम करने में सहायक होते हैं। बादाम और सूरजमुखी के बीज में भरपूर मात्रा में विटामिन ई मौजूद होता है, जबकि अखरोट और अलसी ओमेगा-3 फैटी एसिड के स्रोत हैं, जो कि जलनरोधी होता है और आंखों की रोशनी, मस्तिष्क एवं हृदय के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। सब्जा, चिया सीड्स का एक अच्छा विकल्प है। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, ओमेगा 3 फैटी एसिड, आयरन और फाइबर होते हैं।

महिलाओं के लिए सुपरफूड्स

​​​​​​​मछली

यह ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन, न्यूरोइन्फ्लेमेशन को कम करने और हृदय एवं आंखों के लिए सप्ताह में कम से कम दो बार मछली के सेवन की सलाह देता है। गर्भावस्था के दौरान साल्मन (रावस), सार्डिन (पडवा), मैकेरल (बांगड़ा) जैसी तैलीय मछलियों का सेवन करने से बच्चे के संवेदी, संज्ञानात्मक और मोटर तंत्र के विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

दूध और दही

दुग्ध उत्पादों में कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, थियामिन, राइबोफ्लेविन, फोलेट, विटामिन ए और विटामिन डी होता है। हड्डियों और दांतों को स्वस्थ बनाए रखने और ओस्टियोपोरोसिस से बचाव के लिए दूध फ़ायदेमंद है। दही प्राकृतिक प्रोबायोटिक है और आंत को स्वस्थ रखने में सहायक है।

रंगीन फल-सब्ज़ियां

​​​​​​​लाल और पीले रंग के फलों और सब्ज़ियों में विटामिन ए, विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट पाए जाते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली, दृष्टि, त्वचा के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखते हैं और हृदय रोगों से बचाते हैं। गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्ज़ियां गर्भवती महिलाओं के लिए अच्छी होती हैं, क्योंकि इनमें फोलिक एसिड होता है जो जन्म दोषों को रोकने के लिए आवश्यक है।

गर्मी के सुपर फूड्स

  • ​​​​​​​तरबूज़ में उच्च मात्रा में पानी मौजूद होता है। यह हाइड्रेशन, शारीरिक तापमान और इलेक्ट्रोलाइट्स को उपयुक्त बनाए रखने में मदद करता है।
  • नींबू विटामिन सी का अच्छा स्रोत है। मतली और चक्कर से राहत देता है।
  • पुदीना अपच और पेट दर्द जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार है।
  • आंवला खाने से ज़ुकाम नहीं होता। बालों व त्वचा के लिए अच्छा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
  • आम में विटामिन ए, विटामिन सी और फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। मधुमेह रोगियों इसका सीमित सेवन करें।

सहजन की फली

सहजन या मुनगा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स के अलावा विटामिन ए, सी, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन और अमीनो एसिड्स होते हैं। इसमें पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम होता है इसलिए इसकी सब्ज़ी बनाकर खाना चाहिए।

जड़ी-बूटी और मसाले

दालचीनी मधुमेह रोगियों में रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करती है। हल्दी को इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण के लिए जाना जाता है। अदरक, पेट ख़राब होने और मतली जैसी समस्याओं में असरदार होता है।

केला

पाचन ठीक करता है। इसमें मौजूद पोटैशियम बीपी दुरुस्त रखता है, मैग्नीशियम कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करता है। रोज़ाना एक या दो केले खा सकते हैं। मधुमेह के मरीज़ चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

घी और तेल

तेल-घी सुपरफूड तब कहलाते हैं जब इनका इस्तेमाल सही तरीक़े से किया जाए। इनका चुनाव उनके स्मोकिंग पॉइंट के आधार पर करें क्योंकि अधिक ताप पर गर्म करने पर उनकी पौष्टिकता घट जाती है।

  • देसी घी में वसा में घुलनशील विटामिन ए, डी, ई और के मौजूद होते हैं जो प्रतिरोधक और पाचन क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।
  • जैतून का तेल असंतृप्त वसा का अच्छा स्रोत है। इसका उपयोग कम आंच पर खाना पकाने में करें।
  • अलसी के तेल में ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं लेकिन इसका स्मोकिंग पॉइंट कम होता है। इन तेलों का मेल अच्छा विकल्प हो सकता है।
  • सूरजमुखी के तेल में विटामिन ई और ओमेगा-6 फैटी एसिड होते हैं।

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