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सारंगढ़ /किसानों से लूट,व्यापारियों को छूट..! बिना धान ढाला कराये बोरी पलटी का चल रहा खेल..प्रबंधक लाला का बड़ा गड़बड़झाला.. एसडीएम नंदकुमार चौबे ने दिया कठोर कार्यवाही का भरोसा….

जगन्नाथ बैरागी

रायगढ़ 28 Dec 2021। किसानों के लिए अनाज संतान के समान होती है। छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं के लिए धान ही प्रमुख फसल होती है। 120 से 150 दिन तक किसान अपने फसलों को खून पसीने से सींचकर बड़ा करता है, और उसे सरकारी समर्थन मूल्य में बेचकर अपने पूरे परिवार का पूरे साल भर खर्च उठाता है। इसी पैसे से बेटे के लिए ड्रेस,बिटिया के लिए पुस्तक, पत्नी का ईलाज से लेकर खुद की दैनिक आवश्यक्ताओं की पूर्ति भी करता है। लेकिन लालाराम पटेल जैसे कुछ ऐसे भी प्रबंधक होते हैं जिनको किसानों की मजबूरी या परेशानी से कोई सबब नही होता..? बल्कि वो तो किसानों के साथ-साथ प्रशासन को भी लूटने में भी कोई कमी नही छोड़ते। और जो प्रबंधक सरकार को लूटने में माहिर हो वो किसी गरीब का भलाई करे ये मुमकिन कैसे?

गरीबों को परेशान अमीरों और व्यापारियों पर मेहरबान..!

सेवा सहकारी समिति अमझर में कुछ किसानों ने बताया कि प्रबंधक लाला पटेल द्वारा गरीब किसानों को नमी,सफाई के नाम से परेशान किया जाता है। और बड़े किसानों और व्यापारीयों से पैसे लेकर बकायदा बिना धान को ढाला कराये बोरी से बोरी पलटी कराई जाती है। जिस पर मीडिया ने अमझर सोसायटी जाकर स्ट्रिंग किया गया तो किसानों की शिकायत सही पाई गयी । प्रबंधक लालाराम पटेल फड़ में थे और कुछ किसान बकायदा बोरी-से बोरी धान पलटी कर रहे थे जिसका वीडियो भी सबूत के तौर पर बनाकर रखा गया है।

बिना ढाला किये बोरी से बोरी धान पलटी का प्रबंधक चला रहा खेल-

सरकार द्वारा सभी प्रबंधकों को धान ढाले, तौलने,और स्टैकिंग करने का प्रति क्विन्टल की दर से निर्धारित रुपये दिए जाते हैं। इस पर प्रबंधक लाला अपने कुछ चहेतों और व्यापारियों को घर से धान तौलकर लाने कहता है। और घर से धान तौलकर लाये गये 25% बोरी को रखकर बाकी को एक बोरी से दूसरे बोरी में किसानों को भरने के लिए कहता है। जिससे लाला को प्रति क्विन्टल लगभग 10 रुपये का फायदा हो जाता है।

अब मान लीजिए अमझर सोसाइटी में 40 हज़ार क्विन्टल धान की खरीदी होनी है तो ऐसे में लगभग 400000(चार लाख ) रुपये की शुद्ध आमदनी लालाराम के पॉकेट में जायेगा। अगर आधे गरीब किसान जिनको ढाला कराया जाता हो उनका भी पैसा काट देने से लगभल 200000 रुपये का सिर्फ बोरी से बोरी पलटी कराने से प्रबंधक फायदा कमा रहे है। साफ-सफाई,और अन्य के पैसे को छोड़कर। उसपर भी चाहे छोटे किसान हो या बड़े सब अपने बोरी में खुद धान भरते है उसमें भी अगर प्रति क्विन्टल 2 रुपये जोड़ें तो 80000 (80 हज़ार से 1 लाख) की कमाई प्रबंधक द्वारा की जा रही है।

लाला किहिस है धान एक्स्ट्रा लेना- धान तौलक

अमझर सोसाइटी के साथ ही प्रबंधक लाला को उप सोसायटी मल्दा(ब) का भी प्रभार दिया गया है। वहां जाकर ग्राउंड रिपोर्टिंग किया गया तो किसानों से तय भार से अधिक मात्रा में धान तौला जा रहा था। हमाल भाइयों से बात करने पर उन्हीने बताया कि प्रबंधक लाला राम पटेल के आदेश ओर हम 200 से 500 ग्राम अधिक धान किसानों से ले रहे हैं उपरोक्त बात की वीडियो भी सबूत के तौर पर मौजूद है। अगर औसतन 300 ग्राम प्रति 40 किलो बोरी की माने तो एक क्विन्टल मे 750 ग्राम अब सोचिए कितने लाख का गड़बड़झाला किया जा रहा है ? जबकि साहब के पास 1 नही 2 सोसायटी के प्रभार है।

डी आर की मेहरबानी से बढ़ रही मनमानी?-

सूत्रों की माने तो प्रबंधक लालाराम पटेल पर डी.आर साहब की कृपादृष्टि कुछ ज्यादा ही है, क्योंकि साहब पिछले शिकायत और वर्तमान शिकायत पर भी अपनी नरमी बरतने में कोई कसर नही छोड़ रहे हैं। किसानों से धान तौलाई के नाम से पैसा लेने की शिकायत, अधिक मात्रा में धान लेने और आज जब सबूत के तौर पर वीडियो भेजने के पश्चात उनके द्वारा जब पूछा गया कि कौन से सोसायटी का है और प्रबंधक कौन हैं तो मीडिया के द्वारा जब लालाराम पटेल का नाम बताया गया तो साहब सुन्न पड़ गये..! क्यों ?

संवेदनशील एसडीएम ने दिया कार्रवाई का भरोसा-

जब हमने सारंगढ़ के संवेदनशील और गरीबों के हितैषी एसडीएम नंदकुमार चौबे को लाला के कारनामे की जानकारी दी और लाला के आदेश से फड़ में हो रहे बोरी से बोरी धान की पलटी की जानकारी दी तो उनका साफ शब्दों में कहना था कि ऐसा करना नियम के विरुद्ध है , रुकिए मैं कार्रवाई करने तहसीलदार या किसी को भेजता हूँ। किसानों के साथ गलत करने वालो को बक्शा नही जायेगा।

सूचना मिलते ही खुद को बचाने कराया ढाला-

डी आर श्री गोंड और एसडीएम सारंगढ़ को जैसे ही वीडियो भेजा गया तत्काल खुद को बचाने के लिए प्रबंधक लाला ने अपने चहेतों को धान ढाला करके भरने का निर्देश दे दिया जिसकी सूचना मीडिया को किसानों द्वारा दी गयी।

सवाल एक कार्यवाही कब-

एक प्रबंधक के कारनामे से जब गरीब किसान त्रस्त हो चुके हैं और उनको अपने उच्चाधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है तो भला ऐसे में उनपर विभागीय कार्रवाई की उम्मीद करना बेमानी होगी? अब सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई का इंतज़ार है। अगर उक्त प्रबंधक पर जल्द कार्रवाई नही की गई तो गरीब जनता ऐसे ही परेशान होते रहेंगे,और सरकार को ऐसे ही वित्तीय नुकसान होते रहेगा।..!

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