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स्थानीय जनता का राजमहल के प्रति आक्रोश कांग्रेस प्रत्याशी डॉ मेनका सिंह को पड़ेगा भारी…!

माथे देखकर पत्रकारों का लगाया गया तिलक?

स्थानीय प्रत्याशी होने के बावजूद सारंगढ़ में क्यों पिछड़ते नज़र आ रही कांग्रेस? पढ़िए..

सारंगढ़: आजादी के बाद देश में राजे-रजवाड़ों का दौर भले ही खत्म हो गया हो, राज करने और माननीय बने रहने की इच्छा खत्म नहीं हुई। छत्तीसगढ़ के ज्यादातर राजपरिवार कांग्रेस से ही जुड़े रहे, छत्तीसगढ़ में हुए विगत विधानसभा चुनाव में बीजेपी 5 सालों बाद फिर से सत्ता में लौटी है। लेकिन राज्य गठन के बाद ऐसा पहली बार ऐसा हुआ जब नई विधानसभा में राजपरिवार का कोई सदस्य नहीं रहेगा। राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाले सारे नेता चुनाव हार गए हैं। वहीं कई ऐसे भी प्रत्याशी रहे जो विरासत में मिली राजनीति को इस चुनाव में आगे नहीं बढ़ा पाए और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। ऐसे माहौल मे जब देश के साथ छत्तीसगढ़ में मोदी का तूफ़ानी माहौल चल रहा है उसी दरमियान रायगढ़ लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में राजपरिवार से ताल्लुख रखने वाली डॉक्टर मेनका सिंह को टिकट देकर कांग्रेस आलाकामान एक तरह से भाजपा इस इस लोकसभा चुनाव में वॉक ओवर दी दिया है ऐसा राजनैतिक विश्लेषकों के साथ ही आम जनता का मानना है।

स्थानीय प्रत्याशी होकर भी सारंगढ़ में पिछड़ते नज़र आ रही कांग्रेस ?

सारंगढ़ बिलाईगढ़ में संगठन क्षमता और योग्य प्रत्याशियों को देकर देकर जिले की दोनो विधानसभा में जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस को इस लोकसभा में सारंगढ़ से ही भारी मतों से पिछड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है, विधान सभा में जिस तरह जी जान लगाकर दिन- रात काम करने वाले कार्यकर्ता कहीं नज़र नही आ रहे और जो नज़र आ भी रहे हैँ उनमे भी उत्साह और विश्वास नही दिख रहा, कार्यकर्ताओं के चेहरे में भी महल परिवार को देकर मिलने पर मायूसी साफ झलक रही है जिसका कारण हमने स्थानीय लोगों से पूछा तो कुछ बातें सामने आई ।

क्या सारँगढ़ महल के दरवाजे जनता के लिये खुले रहेंगे ?

सारँगढ़ में डॉ मेनका सिंह को टिकट मिलने पर लोकसभा चुनाव के दौरान आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है रायगढ़ लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति जाति वर्ग के आरक्षित है जिसमे सारँगढ़ राज महल की बेटी डॉ मेनका सिंह को कॉंग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है दूसरी तरफ भाजपा ने सीधे सरल और सामान्य परिवार से ताल्लुख़ रखने वाले राधेश्याम राठिया को उम्मीदवार बनाया गया उस, अब देखना होगा जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा? ये तो 7 जून को पता चलेगा लेकिन सारंगढ़ की जनता का मानना है की वर्तमान में जब बड़े-बड़े चेहरों को भी राजमहल के द्वार से अंदर जाने के लिए जब ज़द्दोजहद करना पड़ता है तो जीत के बाद आम जनता का क्या होगा? लोग तो यहाँ तक कह रहे हैँ जिन राजपरिवार के लोगों को जिन्हे देखना भी मुश्किल है उनके चुनाव में जीतने के बाद उनसे मुलाकात कर पाना असंभव होगा ? प्रत्याशी होते जिनके दरवाजे जनता के लिए अभी से बंद है तो आगे विजयी होने के बाद क्या और खुला रहेगा ?
इसलिए जो कांग्रेस के रीति नीति से प्रभावित होकर वोट करते थे उनके मन में भी महल परिवार से दूरी बढ़ने की संभावना है।

स्थानीय जनता का राजमहल के प्रति आक्रोश –

प्राप्त जानकारी के मुताबिक सारँगढ़ में राज महल को लेकर स्थानीय लोग काफ़ी आक्रोशित हैँ, और तो और इस परिवार के खिलाफ़ सारंगढ़ में कई दफ़ा स्थानीय जनता और संगठन ने धरना व आंदोलन प्रदर्शन कर अपनी नाराज़गी जताई है, जिसका सीधा – सीधा नुकसान लोकसभा कांग्रेस प्रत्याशी को उठाना पड़ेगा। है जनता कह रही है जिन्हे देखना मुश्किल है क्या जीतने के बाद उनसे मुलाकात कर पाना संभव है ?अब जरा सोचे की जनता के दरवाजे अभी से बंद है तो आगे जीतने के बाद क्या कभी खुला रहेगा ?

जनता के नज़र में हरिहाठ मेला का विरोधी है राजपरिवार ?

धार्मिक गढ़ माने जाने वाले सारंगढ़ में विगत कुछ वर्षो से हरि-हाठ मेला को लेकर काफी विवाद चला था जिसका मुख्य कारण पब्लिक गिरी गिरी – विलास को मानते हैँ, कई बार स्थानीय जनता और संगठनों को विरोध प्रदर्शन करना पड़ा जिसके फलस्वरूप अंततः हरिहाठ यज्ञ एवं मेला को हरी झंडी मिला भाजपा चुनाव में इसे मुद्दा बनाकर सारंगढ़ में पेश करेगी इसमे कोई दो राय नही है, जिससे कांग्रेस प्रत्याशी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

माथे देखकर पत्रकारों को लगाया गया तिलक! पत्रकार जगत में आक्रोश -?

विगत दिनों महल में आयोजित पत्रकार वार्ता में पत्रकारों से बमुश्किल 10 मिनट भी समय ना देना और रानी की भाँती खड़े खड़े नाम पूछकर भाग जाना कलमकारों के प्रति कांग्रेस प्रत्याशी का असम्मान समझा जा रहा है, उनका रवैया अभी भी राज-रानी का अहसास करा गया। उपर से उनके मीडिया प्रबंधन समिति का दाइत्व है सभी कलमकारों को जिन्हे प्रेस वार्ता में बुलाया गया है उनके समान सम्मान दें, राज्य लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्यासी के मीडिया प्रबंधन ग्रुप स्वयं एवं अपने चहेतों को ही लाभ पहुंचाना आग पर घी डालने का काम कर गई है। मीडिया प्रबंधन समिति के सदस्यों का माथे देखकर तिलक लगाना इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ मेनका सिंह को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाएगा इस पर कोई दो राय नही है!

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